स्तन कैंसर महिलाओं के लिए एक अभिशाप है. क्योंकि यह जानलेवा तो है हीं, और बच जाने पर भी स्तनों को ऑपरेशन के जरिये निकलना पड़ता है. और स्तनों के बिना किसी भी महिला का व्यक्तित्व अपना आकर्षण खो देता है. तो अगर आप महिला हैं और स्तन कैंसर को लेकर जागरूक नहीं हैं, तो जागरूक हो जाइए…. ताकि आप इस बीमारी से बची रहें. तो आइए जानते हैं कि स्तन कैंसर के प्रारम्भिक लक्षण क्या हैं, शुरुआत में हीं इसकी रोकथाम कैसे की जा सकती है. और हम यह भी जानेंगे कि इस मामले में लापरवाही की आपको क्या-क्या कीमत चुकानी पड़ सकती है. हम स्तन कैंसर के इलाज के बारे में भी जानेंगे.ब्रैस्ट कैंसर के लक्षण :
शुरुआत में स्तन कैंसर के लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता जाता है…… इसके कुछ लक्षण उभरने लगते हैं.
स्तन या कांख में कोई गांठ होना. ऐसे गांठ में सामान्यतः दर्द नहीं होता है, लेकिन कभी-कभी हल्की सी चुभन हो सकती है.
कांख में सूजन हो जाना.
शुरुआत में गांठ का आकार चावल के दाने के बराबर होता है.
स्तन में दर्द होना या स्तनों का सामान्य से ज्यादा मुलायम हो जाना या स्तनों का सख्त हो जाना.
स्तनों पर खुद-ब-खुद खरोंच पड़ना.
स्तनों का रंग, आकार या तापमान बदलना.
निप्पलस का आकार या रंग बदल जाना, या उनमें दाने आ जाना. निप्पलस में खुजली होना या झनझनाहट होना.
निप्पलस से तरल पदार्थ या खून का निकलना, हाँलाकि कभी-कभी ऐसा दूसरे कारणों से भी हो सकता है.
जानकारी की कमी और शर्म की वजह से ज्यादातर महिलाएँ स्तन कैंसर के गम्भीर रूप लेने के बाद हीं डॉक्टर के पास जाती है.
मेमोग्राफी टेस्ट करवाने से स्तन कैंसर का पता लगाया जा सकता है. मेमोग्राफी करवाने में ज्यादा खर्चा नहीं आता है. 30-35 वर्ष की आयु के बाद हर महिला को यह टेस्ट जरुर करवानी चाहिए.
गांठ का आकार समय के साथ बढ़ता जाता है.
शीशे के सामने खड़े होकर अपने हाथों को धीरे-धीरे स्तनों पर ऊपर से नीचे की तरफ लायें. कोई गांठ होगी तो आपको अहसास होगा. प्रत्येक सप्ताह इस तरह आप खुद गांठ की जाँच कर सकती हैं.स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले कुछ सम्भावित कारण :
देरी से मां बनना.
बच्चे को कम समय तक दूध पिलाना.
पीरियड का कम उम्र में हीं शुरु हो जाना.
रजोनिवृत्ति देर से होना.
शराब पीना.
धूम्रपान करना.
वजन बहुत ज्यादा होना.स्तन कैंसर से बचने के कुछ उपाय :
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